| हमले के दौरान अफगान संसद में बदहवासी। धमाकों के बाद सांसद इधर-उधर भागने लगे। तब स्पीकर इब्राहिमी ने उन्हें शांति से बैठने को कहा। उन्होंने कहा, 'बैठ जाइए ये बिजली की गड़बड़ी के कारण हो रहा है।' हकीकत समझ आने पर उन्हें भी भागना पड़ा। काबुल | तालिबानके आत्मघाती आतंकियों ने सोमवार को काबुल में अफगानिस्तान की संसद पर हमला कर दिया। संसद भवन के बाहर और भीतर करीब दो घंटे तक सुरक्षा बलों से मुठभेड़ हुई। सभी सात हमलावर मारे गए। घटना में एक बच्चे और एक महिला सहित दो नागरिक भी मारे गए। मुठभेड़ के दौरान सदन में मौजूद सभी सांसदों को बचा लिया गया। हमला उस समय हुआ, जब उप राष्ट्रपति सरवर दानिश सदन में देश के नए रक्षा मंत्री मासू स्टैंकजई का परिचय करा रहे थे। अफगानिस्तान में भारत के राजदूत अमर सिन्हा ने ट्वीट कर बताया कि सभी भारतीय सुरक्षित हैं। पहलेमेन गेट पर विस्फोट किया : काबुलके पुलिस प्रवक्ता अब्दुल्ला करीमी ने बताया कि आत्मघाती हमलावरों ने संसद भवन में घुसने के लिए पहले मेनगेट पर कार बम विस्फोट किया। इस दौरान मची अफरा-तफरी का लाभ उठाते हुए छह हमलावर संसद भवन में घुस गए। वहां उन्होंने करीब सात धमाके किए। इससे संसद भवन की इमारत हिल गई। लेकिन सुरक्षा बल के जवानों ने उन्हें खदेड़ कर पास की इमारत में शरण लेने को मजबूर कर दिया। इसके बाद मुठभेड़ में सभी हमलावर मारे गए। तालिबानने ली जिम्मेदारी : तालिबानके प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने फोन पर इस हमले की जिम्मेदारी ली। उसने कहा कि नए रक्षा मंत्री की नियुक्ति रोकने के लिए संसद पर यह हमला किया गया। करीब 13 साल बाद अमेरिका के नेतृत्व वाली सेना स्वदेश लौट रही है और देश की सुरक्षा की कमान अफगानिस्तान की सेना संभाल रही है। इसकी कमान नए रक्षामंत्री के हाथ में होगी। 2012में हुई थी संसद पर हमले की कोशिश : आत्मघातीहमलावरों ने 2012 में भी अफगानिस्तान की संसद पर हमला करने की कोशिश की थी। उसके साथ ही तब तालिबान ने काबुल के कई हिस्सों और डिप्लोमेटिक एन्क्लेव पर भी हमले किए थे। तालिबानको अमेरिका ने हटाया था सत्ता से अमेरिकाने 2001 में अफगानिस्तान पर हमला कर सत्तारूढ़ तालिबान को सत्ता से हटा दिया था। उसके बाद से तालिबान लगातार अमेरिकी सेना और उसके ठिकानों को निशाना बनाता रहा है। अमेरिका ने तालिबान को आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। दोजिलों पर तालिबान कर चुका है कब्जा अफगानिस्तानके उत्तर में कुंदुज प्रांत के दो जिलों पर तालिबान ने कुछ दिन पहले ही कब्जा कर लिया है। प्रांतीय परिषद के प्रमुख मुहम्मद यूसुफी ने बताया कि तालिबान के लड़ाकों ने दश्ती आर्ची जिले को चारों तरफ से घेर कर उस पर कब्जा कर लिया है। वहां कितने लोग मरे यह पता नहीं है। लेकिन 15,000 लोग वहां से निकल नहीं पा रहे हैं। तालिबान ने इस जिले और सेना के चार टैंकों तथा शस्त्रागार पर नियंत्रण की पुष्टि की है। तालिबान ने रविवार को कुंदुज प्रांत के ही चारदरा जिले पर कब्जा किया है। |
Tuesday, 23 June 2015
अफगान संसद पर आतंकी हमला
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