रीकॉल
एसएमएस हॉस्पिटल में ट्रांसप्लांट शुरू होने में कितना समय लगेगा? राजस्थानसरकार से प्रस्ताव मिलने और दिल्ली सरकार की मंजूरी के बाद एसएमएस हॉस्पिटल में कैडेबर लीवर ट्रांसप्लांट शुरू करने में छह महीने लगेंगे। इसके लिए एमओयू साइन होना जरूरी है। दुनिया की सबसे जटिल सर्जरी लीवर ट्रांसप्लांट में जल्दबाजी नहीं कर सकते। ट्रांसप्लांट में सफलता के लिए सब्र रखना जरूरी है। हमारी टीम धीरे-धीरे कदम रखेगी। सुपरविजन में काम शुरू होगा। जयपुर से एसएमएस हॉस्पिटल के गेस्ट्रो सर्जन डॉ. अजय शर्मा और गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. संदीप निझावन आईएल
बीएस के साथ मिलकर काम करेंगे। एसएमएसका इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त है? एसएमएसहॉस्पिटल सर्जरी के लिए एडवांस सेंटर बन चुका है। ट्रांसप्लांट शुरू करने से पहले उनकी टीम हॉस्पिटल विजिट करेगी। तभी सच्चाई और आवश्यकताओं के बारे में मालूम चलेगा। इसके अलावा हॉस्पिटल का थियेटर, ब्लड बैंक, आईसीयू, पैथोलॉजी लैब की जांच होगी। डॉक्टर्स और नर्सिंग कर्मचारियों को ट्रेंड करेंगे। यह सभी तैयारियों होने पर डोनर और पेशेंट मिलने पर ट्रांसप्लांट कर देंगे। एसएमएसमें ट्रांसप्लांट का पहला प्रयास असफल क्यों रहा? लीवरट्रांसप्लांट में सफलता के लिए स्थायी प्रोग्राम जरूरी है। एसएमएस में पहला ट्रांसप्लांट असफल क्यों रहा? इसके बारे में बता पाना मुश्किल है। लेकिन शुरूआत में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। पहले प्रयास में जटिल केस नहीं लेना चाहिए। कम गंभीर पेशेंट को ट्रांसप्लांट के लिए लेना चाहिए। ट्रांसप्लांट की सफलता लीवर की क्वालिटी पर निर्भर करती है। लीवरट्रांसप्लांट पर कितना खर्च आएगा? प्राइवेटहॉस्पिटल में कैडेबर और लाइव लीवर ट्रांसप्लांट पर 25 से 30 लाख का खर्च आता है। जबकि उनके इंस्टीट्यूट में यही ट्रांसप्लांट साढ़े 11 लाख में हो रहा है। एसएमएस में आने वाले खर्च के बारे में अभी कुछ कहना मुश्किल है। खर्च में कंज्यूमर आइटम्स की कॉस्ट महत्वपूर्ण है। करीब तीन महीने पहले लीवर ट्रांसप्लांट असफल होने के बाद ट्रांसप्लांट का काम लगभग अटक गया था। हाल ही में दिल्ली के इंस्टीटयूट ऑफ लीवर एंड बाइलेरी साइंस के पद्मभूषण डॉ. शिव कुमार सरीन से कंसलटेंसी तय होने के बाद एसएमएस प्रशासन की टीम ने दावा किया कि जल्द ही हम लीवर ट्रांसप्लांट में सक्षम होंगे। मंत्री ने भी कहा-नए कंसलटेंट के साथ लीवर ट्रांसप्लांट जल्द होगा। डॉ. सरीन जयपुर में ही पले बढ़े और एसएमएस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस हैं। उन्हें यह जिम्मा सौंपे जाने के बाद हमारी संवाददाता प्रणीता भारद्वाज की उनसे विशेष बातचीत- 90 दिन में संभव नहीं : डॉ. बेरी मंत्रीने किस आधार पर कहा, यह मुझे पता नहीं। जयपुर में 90 दिन में लीवर ट्रांसप्लांट संभव ही नहीं है। 90 दिन में ब्रेन डेड मरीजों से किडनी ट्रांसप्लांट संभव है। अगलेदिन अमेरिकी ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट और तब सरकार के कंसल्टेंट डॉ. क्रिस्टोफर बेरी ने कहा। 90 दिन में लीवर ट्रांसप्लांट : मंत्री राजस्थानमें 50 दिन यानी 26 जनवरी तक किडनी और 90 दिन यानी 6 मार्च तक लीवर ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा। राठौड़ने 6 दिसंबर 2014 को राजस्थान नेटवर्क फोर ऑर्गन शेयरिंग रजिस्ट्री के शुभारंभ पर। एक ही प्राइवेट हॉस्पिटल को लाइसेंस राज्यभरसे लीवर ट्रांसप्लांट के लाइसेंस के लिए तीन प्राइवेट हॉस्पिटल ने आवेदन किया था। इनमें महात्मा गांधी, फोर्टिस और संतोकबा दुर्लभजी हॉस्पिटल शामिल है। इनमें से महात्मा गांधी अस्पताल को लाइसेंस मिला है। आगामी तीन महीने में शुरू होगा लीवर ट्रांसप्लांट ^हॉस्पिटलको लाइसेंस मिल चुका है। ट्रेनिंग के साथ ट्रांसप्लांट की तैयारियां चल रही है। तीन महीने में ट्रांसप्लांट शुरू होगा। यह राज्य का पहला लीवर ट्रांसप्लांट करने वाला हॉस्पिटल होगा। -डॉ.आरसी गुप्ता, अधीक्षक, महात्मा गांधी हॉस्पिटल 8 महीने पहले लाइसेंस के लिए किया आवेदन
^हॉस्पिटलमें ट्रांसप्लांट के लिए अलग से इंस्टीट्यूट बन चुका है। आठ महीने पहले लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। लेकिन अभी तक इंस्टीट्यूट का इंस्पेक्शन नहीं हुआ। फाल अटकी हुई है। जबकि यहां 200 से ज्यादा लीवर सर्जरी हो चुकी है। -डॉ.राजेश भोजवानी, एचओडी,गेस्ट्रो सर्जरी डिपार्टमेंट, संतोकबा दुर्लभजी हॉस्पिटल
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