देश समाचार: June 2015

Tuesday, 23 June 2015

बच्चों को होमवर्क; धूप में निकलो, घटाओं में नहाओ

धूपमें निकलो, घटाओं में नहाकर देखो, जिंदगी क्या है, किताबों को हटाकर देखो। मशहूर शायर निदा फाज़ली की ये लाइनें यहां सटीक बैठती हैं। 
इटली के एक टीचर ने अपने छात्रों को यही संदेश देने की कोशिश की है इस बार छुटि्टयों में। डॉन बॉस्को स्कूल के टीचर सीज़र केटा ने छात्रों को होमवर्क के तौर पर कुछ रोचक चुनौतियां दी हैं। इस लाइफ चेंजिग होमवर्क की चर्चा पूरी इटली में हो रही है। शेष| पेज 6 


इसमेंउन्होंने 15 पॉइन्टस बताए हैं जो छात्रों को खुशनुमा जिंदगी गढ़ने में मददगार होंगे। सीजर ने बताया कि डेड पोएट्स सोसायटी फिल्म में रॉबिन विलियम्स ने ऐसे टीचर का किरदार निभाया है जो पोएट्री के जरिए पढ़ाता है। उसी से उन्हें बच्चों को इस अपरंपरागत तरीके से पढ़ाने का विचार आया, 
15 पॉइंट्स में यह खास 
{डरलगे तो चिंता करें - ऐसी बातों को डायरी में लिख लें, कुछ दिनों बाद फिर पढ़ें, पता चलेगा डर बेवजह था। 
{बातों में नए शब्द इस्तेमाल करें। 
{निगेटिविटी लाने वालों से दूर रहें 
{बेझिझक डांस करें - डांस फ्लोर पर या रूम में, पर दीवानों की तरह करें। 
{उगता सूरज देखें - खामोश रहें, गहरी सांसें लें और प्रकृति को शुक्रिया कहें। 
{उन चीजों की तुलना करें जो पढ़ीं हैं और जिन्हंे सीखा है। 
{खुश रहें - बिल्कुल दमकते हुए सूरज की तरह। 
{कसमें खाएं - बातें नहीं, बेहतरीन बन कर दिखाएं। 


13. फिल्में देखें - जिनमें दिल छू लेने वाले डॉयलाग्स हों। जैसे इंग्लिश फिल्में। लैंग्वेज स्किल सुधारने का यह श्रेष्ठ तरीका है। 
14. सपने देखें - इन्हें पूरा करने के लिए सारी कोशिशें करें 
15. अच्छा बर्ताव करें- खुद से भी और दूसरों से भी। 
एक टीचर के होमवर्क की पूरे इटली में चर्चा 

अफगान संसद पर आतंकी हमला

हमले के दौरान अफगान संसद में बदहवासी।
धमाकों के बाद सांसद इधर-उधर भागने लगे। तब स्पीकर इब्राहिमी ने उन्हें शांति से बैठने को कहा। उन्होंने कहा, 'बैठ जाइए ये बिजली की गड़बड़ी के कारण हो रहा है।' हकीकत समझ आने पर उन्हें भी भागना पड़ा।
काबुल | तालिबानके आत्मघाती आतंकियों ने सोमवार को काबुल में अफगानिस्तान की संसद पर हमला कर दिया। संसद भवन के बाहर और भीतर करीब दो घंटे तक सुरक्षा बलों से मुठभेड़ हुई। सभी सात हमलावर मारे गए। घटना में एक बच्चे और एक महिला सहित दो नागरिक भी मारे गए। मुठभेड़ के दौरान सदन में मौजूद सभी सांसदों को बचा लिया गया। हमला उस समय हुआ, जब उप राष्ट्रपति सरवर दानिश सदन में देश के नए रक्षा मंत्री मासू स्टैंकजई का परिचय करा रहे थे। अफगानिस्तान में भारत के राजदूत अमर सिन्हा ने ट्वीट कर बताया कि सभी भारतीय सुरक्षित हैं।



पहलेमेन गेट पर विस्फोट किया :
काबुलके पुलिस प्रवक्ता अब्दुल्ला करीमी ने बताया कि आत्मघाती हमलावरों ने संसद भवन में घुसने के लिए पहले मेनगेट पर कार बम विस्फोट किया। इस दौरान मची अफरा-तफरी का लाभ उठाते हुए छह हमलावर संसद भवन में घुस गए। वहां उन्होंने करीब सात धमाके किए। इससे संसद भवन की इमारत हिल गई। लेकिन सुरक्षा बल के जवानों ने उन्हें खदेड़ कर पास की इमारत में शरण लेने को मजबूर कर दिया। इसके बाद मुठभेड़ में सभी हमलावर मारे गए।

तालिबानने ली जिम्मेदारी :
तालिबानके प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने फोन पर इस हमले की जिम्मेदारी ली। उसने कहा कि नए रक्षा मंत्री की नियुक्ति रोकने के लिए संसद पर यह हमला किया गया। करीब 13 साल बाद अमेरिका के नेतृत्व वाली सेना स्वदेश लौट रही है और देश की सुरक्षा की कमान अफगानिस्तान की सेना संभाल रही है। इसकी कमान नए रक्षामंत्री के हाथ में होगी।

2012में हुई थी संसद पर हमले की कोशिश :
आत्मघातीहमलावरों ने 2012 में भी अफगानिस्तान की संसद पर हमला करने की कोशिश की थी। उसके साथ ही तब तालिबान ने काबुल के कई हिस्सों और डिप्लोमेटिक एन्क्लेव पर भी हमले किए थे।
तालिबानको अमेरिका ने हटाया था सत्ता से
अमेरिकाने 2001 में अफगानिस्तान पर हमला कर सत्तारूढ़ तालिबान को सत्ता से हटा दिया था। उसके बाद से तालिबान लगातार अमेरिकी सेना और उसके ठिकानों को निशाना बनाता रहा है। अमेरिका ने तालिबान को आतंकी संगठन घोषित कर रखा है।
दोजिलों पर तालिबान कर चुका है कब्जा 

अफगानिस्तानके उत्तर में कुंदुज प्रांत के दो जिलों पर तालिबान ने कुछ दिन पहले ही कब्जा कर लिया है। प्रांतीय परिषद के प्रमुख मुहम्मद यूसुफी ने बताया कि तालिबान के लड़ाकों ने दश्ती आर्ची जिले को चारों तरफ से घेर कर उस पर कब्जा कर लिया है। वहां कितने लोग मरे यह पता नहीं है। लेकिन 15,000 लोग वहां से निकल नहीं पा रहे हैं। तालिबान ने इस जिले और सेना के चार टैंकों तथा शस्त्रागार पर नियंत्रण की पुष्टि की है। तालिबान ने रविवार को कुंदुज प्रांत के ही चारदरा जिले पर कब्जा किया है। 

वसुंधरा पर लगे आरोप बेबुनियाद : गडकरी

दिल्ली में कांग्रेस का हमला
दुष्यंतको जेटली की क्लीन चिट कवर-अप
^साफतौरपर कवर-अप की कोशिश की जा रही है। हम वित्त मंत्री पर आरोप लगाते हैं कि वह राजे के बेटे दुष्यंत सिंह को बचाने के लिए जांच प्रभावित कर रहे हैं।' -गुलामनबी आजाद, कांग्रेस
जयपुर | केंद्रीयसड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ललित मोदी वसुंधरा प्रकरण पर कहा कि वसुंधरा पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं। इन आरोपों में तो कोई लीगलिटी है और ही इसमें करप्शन है। जहां तक इनके बेटे पर आरोप है तो वह पूरी तरह से बिजनेस डील है और इनकम टैक्स रिटर्न में इसकी एंट्री है। किसी से पैसा कर्ज पर लेना गुनाह नहीं है। इस डील को इस तरह राजनैतिक विवादों में लाने की कोशिश की जा रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। वसुंधरा लीगली, लॉजिकली, एथिकली, बिल्कुल करेक्ट हैं। कहीं भी उनकी कोई गलती नहीं है।



कोईकरप्शन नहीं है और कोई अनलॉफुल एक्टिविटी नहीं है। केंद्र और प्रदेश में भाजपा पूरी तरह से वसुंधरा राजे के साथ खड़ी है। इन आरोपों में कोई तथ्य नहीं है और ये बेसलैस (निराधार) हैं। इस प्रकार की राजनीति करना ठीक नहीं है। वसुंधरा राजे ने कोई गलती नहीं की है। कोई करप्शन है, कोई इररेगुलरिटी की है। हम कल भी उनके साथ थे और आज भी उनके साथ हैं और किसी प्रकार का कन्फ्यूजन हमारे माइंड में नहीं है। 

कैलाश के लिए पहली बार खुला रास्ता

 कैलाशमानसरोवर यात्रा के लिए चीन ने सोमवार को पहली बार नाथू-ला दर्रा खोल दिया। नए रास्ते से कैलाश जाने वाले पहले जत्थे में 40 श्रद्धालु हैं। इस रास्ते से पांच बैच में 250 श्रद्धालु कैलाश जाएंगे। यहां से श्रद्धालु 1500 किमी की यात्रा बस से तय करेंगे 
कैलाश के लिए पहली बार खुला नाथू-ला 

राजनीतिक नियुक्तियों पर लगे वकीलों के प्रदर्शन पर उठे सवाल

प्रदेशमें जिस पार्टी की सरकार होती है उसके नेता ही जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर को नाम सुझाते हैं। उन्हीं नामों का पैनल तैयार कर सरकार को भेजा जाता है। 
यहहोना चाहिए 
{राजनीितकनियुक्ति वाले वकीलों की जिम्मेदारी तय हो। नियुक्ति प्रक्रिया भी पारदर्शी होनी चाहिए। 
{छह माह में परफॉरमेंस रिपोर्ट ली जानी चाहिए। 
आंकड़े पिछले विधानसभा सत्र में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार। 
इसलिए जीत | मजबूत मॉनिटरिंग 
मॉनिटरिंगसिस्टम बना हुआ है। सरकार की तरफ से मजबूती से पक्ष रखते हैं, क्योंकि यह इनकी कॅरिअर ग्रोथ से जुड़ा हुआ है। हर पांच साल में बदलते नहीं हैं। 
हार इसलिए | जवाबदेही नहीं 
स्पष्टजिम्मेदारी नहीं। कोई मॉनिटरिंग सिस्टम भी नहीं। सरकार को यह तक पता नहीं है कि कितने मामलों में ये वकील पैरवी कर रहे हैं और इनका ओवरऑल रिजल्ट कितना हैं। 
परीक्षा पास कर बने 664 सरकारी वकील 
{ये664 सरकारी वकील आरपीएससी से चयनित। 
{इनमें 240 अभियोजन अधिकारी 424 सहायक अभियोजन अधिकारी हैं। 
{सालानावेतन कुल 60 करोड़, अन्य सुविधाएं। 
{मजिस्ट्रेटकोर्ट्स में सरकारी मामलों की पैरवी करते हैं। 
सिफारिश पर नियुक्त 370 वकील 
{कलेक्टरजिला जज की सिफारिश पर नियुक्ति होती है। 
{370 में से 27 सुप्रीम कोर्ट, 90 हाईकोर्ट 217 अधीनस्थ कोर्ट में केस देख रहे हैं। 
{सालानावेतन कुल 40 करोड़ रु., सुविधाएं अलग। 
{सेशनऊपरी कोर्ट में सरकार की पैरवी करते हैं। 
...लेकिन तस्वीर यह भी 
जोभर्ती परीक्षा पास कर वकील बने वे सरकार को दिला रहे 90 फीसदी मामलों में जीत 
मनोजशर्मा | जयपुर 
अदालतोंमें लाखों केस पेंडिंग हैं। हर सरकार अपने कार्यकाल में खुद के मामलों की पैरवी के लिए करीब पौने चार साै वकीलों को मानदेय पर पब्लिक प्रोसिक्यूटर (पीपी), एडिशनल पब्लिक प्रोसिक्यूटर (एपीपी) और स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर नियुक्त करती है। ये वो वकील होते हैं जो हर पांच साल में बदल जाते हैं। यानी सरकारों के साथ चलने वाले। राजनीतिक तौर पर हुई इन नियुक्तिओं पर सालाना 40 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होता है, जबकि सरकारी वकीलों की तुलना में ये वकील सिर्फ 10 फीसदी केसों में सरकार को जीत दिला पाते हैं। वजह साफ है- राजनीतिक तौर पर नियुक्त वकीलों की जिम्मेदारी तय नहीं होती। इनकी तुलना में सरकारी वकील 90 फीसदी केसों में जीत दिलवा रहे हैं। विशेषज्ञ खुद मानते हैं-भले ही नियुक्तियां राजनीतिक हों, लेकिन इनकी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। सरकार ऐसी नियुक्तियों पर एक कार्यकाल में 200 करोड़ रु. तक खर्च करती है। 
पढ़िएभास्कर की स्पेशल रिपोर्ट... 
92% 
से ज्यादा केसों में जीत 
10% 
से भी कम केसों में जीत 
जस्टिस वी एस दवे, रिटायर्ड जज, राजस्थान हाईकोर्ट 
जबपॉलिटिकल एप्रोच से नियुक्तियां होती है तो वे लाेग भी कामयाब हो जाते हैं जिन्हें सामान्य तौर पर एक-दो मुकदमे भी नहीं मिलते। यदि वास्तव में सरकार सजा का प्रतिशत बढ़ाना चाहती है तो सिस्टम डवलप करना होगा। 










अच्छे वकील नियुक्त करने होंगे। इसके लिए अच्छे पैसे भी खर्च करने होंगे। तभी नतीजे अच्छे मिलेंगे। 

काउंसलिंग के लिए विकल्प भरने का एक और अवसर मिलेगा

मदसविवि की ओर से बीएसटीसी की काउंसलिंग में विकल्प भरने के लिए अभ्यर्थियों को एक और अवसर दिया गया है। जिन अभ्यर्थियों ने 17 जून 2015 तक अपना रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करवा दिया है, किंतु काउंसलिंग के लिए अपने विकल्प नहीं भरे हैं। ऐसे अभ्यर्थियों को एक और मौका दिया जाता है कि वह 24 तक अपने विकल्प आवश्यक रूप से भरें। यदि इस संबंध में उन्हें पासवर्ड संबंधी अथवा चालान वेरिफाई नहीं होने संबंधी कोई परेशानी रही हो तो वेबसाइट पर उपलब्ध दूरभाष संख्या तथा ईमेल आईडी पर संपर्क कर अथवा बीएसटीसी कार्यालय में व्यक्तिशः संपर्क कर अपना समाधान निकलवा लें तथा काउंसलिंग के लिए अपने विकल्प भर कॉलेज च्वाइस लाॅक करें। 24 जून को लिंक स्वतः ही निष्क्रिय हो जाएगा तथा शेष रहे अभ्यर्थियों को इसके पश्चात अभ्यर्थी को कोई अवसर प्रदान नहीं किया जाएगा। 

जयपुर-उदयपुर के लिए 15 से स्पाइस जेट की फ्लाइट

जयपुर-उदयपुरके लिए दो साल बाद स्पाइस जेट की फ्लाइट शुरू होगी। फ्लाई का वर्तमान में 15 जुलाई से संचालन होना है। इसके लिए एयरपोर्ट �'थोरिटी ने स्पाइस जेट एयरलाइन को मंजूरी दे दी है। फ्लाइट दिल्ली से वाया जयपुर होती हुई उदयपुर पहुंचेगी। जयपुर-उदयपुर की यह कनेक्टिविटी दो साल बाद शुरू होगी। वापसी में भी फ्लाइट का रूट यहीं रहेगा। इस संबंध में एयरपोर्ट अथॉरिटी ने महाराणा प्रताप एयरपोर्ट मैनेजमेंट को अनुमति भेज दिया है। फ्लाइट दिल्ली से सुबह 7 बजे रवाना होगी। 8 बजे जयपुर पहुंचेगी। जयपुर में 20 मिनट स्टॉपेज के बाद 8.20बजे उदयपुर के लिए रवाना हो जाएगी। उदयपुर में 9.20 बजे लैंडिंग होगी। उदयपुर से 20 मिनट स्टॉपेज के बाद 9.40 बजे जयपुर के लिए रवाना होगी। जयपुर से 10.40 बजे लैंडिंग होगी। यहां पर 20 मिनट स्टॉपेज के बाद 11 बजे दिल्ली रवाना होगी। 
क्यू-400में 75 यात्री कर सकेंगे सफर 
स्पाइसजेट मझले आकार का क्यू-400 मेक का क्राफ्ट संचालित होगा। यह 45 सीटर एटीआर से बड़ा और 140 सीटर एयरबस या बोइंग से छोटा है। छोटे कार्गो का परिवहन भी होगा। 

3 हजार रोजाना पर थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन करा रहा निगम

नगरनिगम क्षेत्र के नालों की सफाई की मॉनिटरिंग पीएचईडी से रिटायर्ड इंजीनियर कर रहे हैं। इसके एवज में नगर निगम इन्हें 3 हजार रुपए रोजाना के देगा। यह पैसा उन्हें दैनिक कार्य के हिसाब से दिया जाएगा। निगम प्रशासन नाला सफाई के कार्य का थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन करवा रहा है। इस काम में पीएचईडी से रिटायर्ड चीफ इंजीनियर आरसी गोयल और रिटायर्ड एसई एके जैन लगाया है। उनको चार-चार जोन दिए गए हैं। वे एक नाले को तीन दफा देखेंगे। यानी सफाई से पहले नाला किस हालत में था और कार्य के दौरान सफाई का काम पूरा होने के बाद। इन इंजीनियरों को 3 हजार रु. रोजाना के हिसाब से भुगतान किया जाएगा और उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही नाला सफाई कर रहे ठेकेदारों का भुगतान होगा। नगर निगम पहली बार नाला सफाई का काम दो अलग अलग चरणों में करवा रहा है। अभी सिर्फ नाला सफाई के वर्कआॅर्डर दिए गए हैं। सिविल कार्य के वर्कआॅर्डर ही नहीं दिए गए। सफाई का काम पूरा होने के बाद नालों को ढकने मरम्मत के कार्य के लिए वर्कआॅर्डर जारी किए जाएंगे। अब से पहले नाला सफाई का काम करने वाली फर्म ही सिविल वर्क भी करती थी। इन्हे एक ही वर्कआॅर्डर दिया जाता था। 
अभी तक 500 नाले ही साफ हुए : शहर में करीब 900 छोटे बड़े नाले हैं। अभी तक 500 से ज्यादा नालों की सफाई हो चुकी है। निगम कमिश्नर के निर्देश हैं कि सफाई से पहले बाद नाले की फोटोग्राफी कर उसे निगम की वेबसाइट पर डाला जाए। इसके लिए क्षेत्रीय इंजीनियरों की टीम काम कर रही है। सभी जोनल आयुक्तों अधिशाषी अभियंताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे नालों की सफाई के दौरान मलबा तुरंत उठवाएं एवं नालों का निरंतर निरीक्षण करें। 
इनका कहना है 
नाला सफाई का थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन पीएचईडी के रिटायर्ड इंजीनियरों से इसलिए करवाया जा रहा है। ताकि सफाई काम में गड़बड़ी को रोका जा सके और काम की बेहतर मॉनिटरिंग हो सके। इसके एवज में एक दिन के मौका निरीक्षण के लिए उन्हें निगम भुगतान करेगा। - गिरिराज सिंह हाड़ा, चीफ इंजीनियर, नगर निगम 

पुलिस एक्ट में सकती है जीरो नंबरी एफआईआर

निष्क्रियकानूनों की समीक्षा कर समाप्त करने की कवायद में जुटी राज्य सरकार अब जीरो नंबरी एफआईआर को कानूनी जामा पहना सकती है। वर्तमान में एक सर्कुलर के आधार पर ही जीरो नंबरी एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान है। लोगों की इसकी ज्यादा जानकारी भी नहीं है। पुलिस एक्ट अथवा रूल्स में शामिल किए जाने से कानूनी तौर पर इसकी मान्यता बढ़ जाएगी। 
गृह विभाग के सचिव संदीप वर्मा की अध्यक्षता में पुलिस कानूनों, रूल्स एवं समय-समय पर जारी सर्कुलर की समीक्षा को लेकर सोमवार को हुई एक बैठक में इस मसले पर चर्चा हुई। इसमें पुलिस, गृह विभाग, एसीबी, होमगार्ड और जेल विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। गृह विभाग ने लंबी प्रक्रिया के बाद 95 पुलिस एक्ट, सर्कुलर एवं रूल्स चिह्नित किए गए, जो प्रचलित है। इनमें कई रूल्स, सर्कुलर एवं एक्ट ऐसे हैं जिनमें संशोधन या समाप्त अथवा मर्ज किया जा सकता है। 
गृह विभाग ने प्रदेश में प्रचलित रूल्स, सर्कुलर एवं एक्ट की सूची डीजीपी, डीजी एसीबी, डीजी होमगार्ड एवं जेल को भिजवा दी है। इसी सप्ताह गृह सचिव वर्मा पुलिस अधिकारियों से चर्चा कर उनकी राय जानेंगे। 


ताकि, मोटे तौर पर यह तय किया जा सके कि किन कानूनों को समाप्त किया जाना है। किन में संशोधन और किन कानूनों को आपस में मर्ज किया जा सकता है। पुलिस अधिकारियों की राय के बाद आगामी सोमवार को गृह विभाग की फिर से बैठक होगी। 
निष्क्रिय कानून हटाए जाएंगे 
राज्य सरकार की मंशा उन कानूनों को समाप्त करने की है जो निष्क्रिय हो चुके हैं। नए कानून बनने के बावजूद कुछ पुराने कानून भी समानांतर रुप से चल रहे हैं। कुछ रूल्स या सर्कुलर ऐसे हैं जिन्हें पुलिस एक्ट में मर्ज किया जा सकता है। 

छुट्टी यात्रा के लिए वीसी को गवर्नर से पूछना होगा

प्रदेशके समस्त सरकारी विश्वविद्यालय के कुलपतियों को छुट्टी या लंबी यात्रा पर जाने से पहले कुलाधिपति (राज्यपाल) से स्वीकृति लेनी होगी। इस संबंध में सोमवार को राजभवन ने सभी कुलपतियों को दिशा-निर्देश देते हुए पत्र भेजे हैं। 
राज्यपाल ने कहा है- विश्वविद्यालय के हित में गतिविधियों के कार्यक्रमों के लिए ही कुलपति यात्रा करें। राज्यपाल चाहते हैं कि वीसी शिक्षा संबंधी कार्यों में गुणवत्ता लाने में प्रशासनिक दक्षता का परिचय दें। कुलपति के लिए उनके विश्वविद्यालय की समस्याओं का निस्तारण, वहां की सुचारू शिक्षा व्यवस्था और विश्वविद्यालयों में प्रवेश से लेकर पदक प्रदान करने तक की व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन ही पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। 
दरअसल प्रदेश में कुछ कुलपति विश्वविद्यालयों कॉलेजों में शैक्षणिक सम्मेलनों में भाग लेने के नाम पर गृह जिलों, पर्यटन स्थलों पर घूमने-फिरने में व्यस्त रहे हैं। ये लोग शैक्षणिक संस्थानों से औपचारिक आमंत्रण पत्र मंगाकर संबंधित विश्वविद्यालयों से इस टीए-डीए उठाकर अपना समय विश्वविद्यालयों के बाहर बिता रहे हैं। इस संबंध में राजभवन में कई बार कुछ शिक्षक शिकायत कर चुके हैं। 

इसी कारण से राजभवन को इस संबंध में आदेश जारी कराने की जरूरत पड़ी है। 

सड़क पर विरोध आफिसरो के छत पर पहुचा ४जी

शहरमें 4जी के जीबीएम माइक्रो-सेल अब सरकारी बिल्डिंग, बिजली पोल, रोड लाइट, सिटी बस स्टैंड शेल्टर पर भी लगाए जा सकेंगे। इसके लिए सरकार ने सभी विभागों को निर्देश गाइडलाइन जारी कर दी है। रिलायंस जियो इन्फोकॉम अब शहर में 4जी की बेहतर कनेक्टिविटी के लिए बिल्डिंग स्थान चिन्हित करेंगे। इसके बाद संबंधित विभाग से साथ मिलकर सर्वे करे तथा फिजिबल रिपोर्ट के बाद जीबीएम माइक्रो सेल लगा सकेंगे। जीबीएम माइक्रो-सेल अब तक लगते रही मोबाइल टावर का विकल्प है। 
शहर में मोबाइल टावरों से रेडिएशन के खतरे को देखते हुए पिछले लंबे समय से लोग विरोध कर रहे हैं। कई जगह टेलीकॉम कंपनियों को अपने टावर हटाने पड़े तथा उनकी क्षमता कम करनी पड़ी। वहीं 4 जी सेवा लेकर रही रिलायंस जियो इन्फोकॉम ने लोगों के विरोध को देखते हुए सरकारी भवनों पर भी जीबीएम माइक्रो-सेल लगाने पर सहमति हासिल कर ली है। 
टेलीकॉम कंपनी के प्रजेंटेशन के बाद सरकार ने सरकारी बिल्डिंगों, बिजली पोल, रोड लाइट, सिटी बस स्टेंड पर 4 जी के माइक्रो सेल जीबीएम लगाने की सहमति दे दी। इसको लेकर सरकार ने सभी सरकारी विभागों को पत्र भी लिख दिया है। जलदाय विभाग ने तो रिलायंस जियो इन्फोकॉम कंपनी के साथ मिलकर अपने भवनों टंकियों का सर्वे भी शुरू करवा दिया है। इसके लिए आला अफसरों ने सभी एक्सईएन को कंपनी के प्रतिनिधियों को सहयोग करने के निर्देश भी दिए है। 
टावर की तुलना में माइक्रो-सेल आसान 
माइक्रो-सेलजीबीएम मोबाइल टावर की तरह ही मोबाइल नेटवर्क बढ़ाने का विकल्प है। इसे बिल्डिंग, बिजली रोड़ लाइट के पोल तथा पानी की टंकी पर आसानी से लगाया जा सकता है। मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या को इस उपकरण से आसानी से दूर किया जा सकता है, ताकि कॉल ड्राॅप की समस्या नहीं हो। बताया जा रहा है कि यह तकनीक यूरोपीयन इकोफ्रेंडली कांसेप्ट पर आधारित है। इन बॉक्स में माइक्रो सेल यानी सिग्नल रिसीव करके कनेक्टिविटी पैदा करने का काम करेगा और जीबीएम यानी गेगा बाइट्स जो कि डाटा से रिलेटेड है और 3जी की तुलना में अधिक तेजी से वर्क करने के काम में सहयोग करेगा। 
5 साल का 5 हजार रुपए किराया 
सरकारीविभाग की संपत्ति पर 4 जी का यूटीलिटी बॉक्स माइक्रो-सेल लगाने के बदले टेलीकॉम कंपनी की ओर से किराए के रूप में 5 साल के एकमुश्त 5 हजार रुपए देना निर्धारित किया गया है। 
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी थी कमेटी 
मुख्यसचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने 31 अक्टूबर 2014 को सभी विभागों, संस्थाओं, निगमों की सरकारी बिल्डिंगों, बिजली पोल सहित अन्य पर जीबीएम माइक्रो-सेल लगाने पर सहमति दे दी थी। इसके बाद 11 नवंबर 2014 को अतिरिक्त मुख्य सचिव (यूडीएच) अशोक जैन की अध्यक्षता में मीटिंग हुई। इसमें पीडब्लूडी, डीएलबी, वन विभाग के अफसरों की रिलायंस जियो इन्फोकॉम के अफसरों के साथ बैठक हुई। इसमें नियम शर्तें तय हुई। पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर (रोड) जी. एल. राव ने इस मीटिंग के मिनट्स जारी किए। 
4जी टावर लगाने के विरोध में शहर में 100 से अधिक जगहों पर पिछले 6 माह में विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। ज्यादातर जगहों पर िबना अनुमति लगा दिए गए थे टावर। 

शिक्षा मंत्री के बंगले में घुसे प्रदर्शनकारी पोलीस ने धक्के देकर निकाला

ग्रेड थर्ड शिक्षक भर्ती में नियुक्ति की मांग, 18 गिरफ्तार 
शिक्षामंत्री के बंगले में घुसे प्रदर्शनकारी 
पुलिस ने धक्के देकर निकाला 
1. सरकारतृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा 2013 की मेरिट में आने वाले आरटेट में 60 फीसदी से कम अंक वालों के दस्तावेज सत्यापन करे, उन्हें नियुक्ति दे।
2.सुप्रीमकोर्ट में चल रहे आरटेट से संबंधित मामले में सरकार उनके पक्ष में मजबूती से पैरवी करे। 
मांग इतनी-सी 
बाहर धरना-अंदर हंगामा...दूर तक दौड़भाग 
शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी के अस्पताल रोड स्थित बंगले में सोमवार को ग्रेड थर्ड शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने दो घंटे तक हंगामा किया। शिक्षक भर्ती 2013 की मेरिट में आने वाले 60 फीसदी से कम अंक वालों को नियुक्ति की मांग थी, प्रदर्शनकारी बंगले में घुस गए। कुछ छत तक जा पहुंचे। पुलिस ने अभ्यर्थियों को धक्का देकर बाहर निकाला। फिर लाठियां भांजकर एसएमएस अस्पताल तक खदेड़ा। हंगामे के समय शिक्षा राज्यमंत्री घर पर नहीं थे। थाना प्रभारी रामप्रताप ने बताया कि शिक्षा मंत्री के घर में जबरन घुसने के मामले में 18 जनों को गिरफ्तार किया है। प्रदर्शनकारियों ने गार्ड के साथ धक्का-मुक्की की और राजकार्य में बाधा डाली है। इस संबंध में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। 

दावों का लीवर फेल, ट्रांसप्लांट 6 माह में

रीकॉल 
एसएमएस हॉस्पिटल में ट्रांसप्लांट शुरू होने में कितना समय लगेगा? 
राजस्थानसरकार से प्रस्ताव मिलने और दिल्ली सरकार की मंजूरी के बाद एसएमएस हॉस्पिटल में कैडेबर लीवर ट्रांसप्लांट शुरू करने में छह महीने लगेंगे। इसके लिए एमओयू साइन होना जरूरी है। दुनिया की सबसे जटिल सर्जरी लीवर ट्रांसप्लांट में जल्दबाजी नहीं कर सकते। ट्रांसप्लांट में सफलता के लिए सब्र रखना जरूरी है। हमारी टीम धीरे-धीरे कदम रखेगी। सुपरविजन में काम शुरू होगा। जयपुर से एसएमएस हॉस्पिटल के गेस्ट्रो सर्जन डॉ. अजय शर्मा और गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. संदीप निझावन आईएल
बीएस के साथ मिलकर काम करेंगे। 
एसएमएसका इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त है? 
एसएमएसहॉस्पिटल सर्जरी के लिए एडवांस सेंटर बन चुका है। ट्रांसप्लांट शुरू करने से पहले उनकी टीम हॉस्पिटल विजिट करेगी। तभी सच्चाई और आवश्यकताओं के बारे में मालूम चलेगा। इसके अलावा हॉस्पिटल का थियेटर, ब्लड बैंक, आईसीयू, पैथोलॉजी लैब की जांच होगी। डॉक्टर्स और नर्सिंग कर्मचारियों को ट्रेंड करेंगे। यह सभी तैयारियों होने पर डोनर और पेशेंट मिलने पर ट्रांसप्लांट कर देंगे। 
एसएमएसमें ट्रांसप्लांट का पहला प्रयास असफल क्यों रहा? 
लीवरट्रांसप्लांट में सफलता के लिए स्थायी प्रोग्राम जरूरी है। एसएमएस में पहला ट्रांसप्लांट असफल क्यों रहा? इसके बारे में बता पाना मुश्किल है। लेकिन शुरूआत में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। पहले प्रयास में जटिल केस नहीं लेना चाहिए। कम गंभीर पेशेंट को ट्रांसप्लांट के लिए लेना चाहिए। ट्रांसप्लांट की सफलता लीवर की क्वालिटी पर निर्भर करती है। 
लीवरट्रांसप्लांट पर कितना खर्च आएगा? 
प्राइवेटहॉस्पिटल में कैडेबर और लाइव लीवर ट्रांसप्लांट पर 25 से 30 लाख का खर्च आता है। जबकि उनके इंस्टीट्यूट में यही ट्रांसप्लांट साढ़े 11 लाख में हो रहा है। एसएमएस में आने वाले खर्च के बारे में अभी कुछ कहना मुश्किल है। खर्च में कंज्यूमर आइटम्स की कॉस्ट महत्वपूर्ण है। 
करीब तीन महीने पहले लीवर ट्रांसप्लांट असफल होने के बाद ट्रांसप्लांट का काम लगभग अटक गया था। हाल ही में दिल्ली के इंस्टीटयूट ऑफ लीवर एंड बाइलेरी साइंस के पद्मभूषण डॉ. शिव कुमार सरीन से कंसलटेंसी तय होने के बाद एसएमएस प्रशासन की टीम ने दावा किया कि जल्द ही हम लीवर ट्रांसप्लांट में सक्षम होंगे। मंत्री ने भी कहा-नए कंसलटेंट के साथ लीवर ट्रांसप्लांट जल्द होगा। डॉ. सरीन जयपुर में ही पले बढ़े और एसएमएस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस हैं। उन्हें यह जिम्मा सौंपे जाने के बाद हमारी संवाददाता प्रणीता भारद्वाज की उनसे विशेष बातचीत- 
90 दिन में संभव नहीं : डॉ. बेरी 
मंत्रीने किस आधार पर कहा, यह मुझे पता नहीं। जयपुर में 90 दिन में लीवर ट्रांसप्लांट संभव ही नहीं है। 90 दिन में ब्रेन डेड मरीजों से किडनी ट्रांसप्लांट संभव है। अगलेदिन अमेरिकी ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट और तब सरकार के कंसल्टेंट डॉ. क्रिस्टोफर बेरी ने कहा। 
90 दिन में लीवर ट्रांसप्लांट : मंत्री 
राजस्थानमें 50 दिन यानी 26 जनवरी तक किडनी और 90 दिन यानी 6 मार्च तक लीवर ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा। राठौड़ने 6 दिसंबर 2014 को राजस्थान नेटवर्क फोर ऑर्गन शेयरिंग रजिस्ट्री के शुभारंभ पर। 
एक ही प्राइवेट हॉस्पिटल को लाइसेंस 
राज्यभरसे लीवर ट्रांसप्लांट के लाइसेंस के लिए तीन प्राइवेट हॉस्पिटल ने आवेदन किया था। इनमें महात्मा गांधी, फोर्टिस और संतोकबा दुर्लभजी हॉस्पिटल शामिल है। इनमें से महात्मा गांधी अस्पताल को लाइसेंस मिला है। 
आगामी तीन महीने में शुरू होगा लीवर ट्रांसप्लांट 
^हॉस्पिटलको लाइसेंस मिल चुका है। ट्रेनिंग के साथ ट्रांसप्लांट की तैयारियां चल रही है। तीन महीने में ट्रांसप्लांट शुरू होगा। यह राज्य का पहला लीवर ट्रांसप्लांट करने वाला हॉस्पिटल होगा। -डॉ.आरसी गुप्ता, अधीक्षक, महात्मा गांधी हॉस्पिटल 
8 महीने पहले लाइसेंस के लिए किया आवेदन 

^हॉस्पिटलमें ट्रांसप्लांट के लिए अलग से इंस्टीट्यूट बन चुका है। आठ महीने पहले लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। लेकिन अभी तक इंस्टीट्यूट का इंस्पेक्शन नहीं हुआ। फाल अटकी हुई है। जबकि यहां 200 से ज्यादा लीवर सर्जरी हो चुकी है। -डॉ.राजेश भोजवानी, एचओडी,गेस्ट्रो सर्जरी डिपार्टमेंट, संतोकबा दुर्लभजी हॉस्पिटल